घर के मंदिर की सफाई कैसे करें? पुरानी पूजा सामग्री का क्या करें
घर के मंदिर में रोज दीपक, फूल और अगरबत्ती रखने से कुछ ही दिनों में राख, तेल के निशान और सूखे फूल जमा होने लगते हैं। सफाई करते समय उलझन केवल धूल पोंछने की नहीं होती। सवाल यह होता है कि मूर्तियाँ कहाँ रखें, तस्वीरों को कैसे साफ करें और पुरानी पूजा सामग्री का क्या करें।
घर के मंदिर की सफाई के लिए पहले दीपक बुझने और ठंडा होने दें। फिर फूल और बर्तन अलग रखें, चौकी साफ करें और मूर्तियों व तस्वीरों को उनकी सामग्री के अनुसार पोंछें। पुरानी सामग्री को एक ही थैले में डालने के बजाय अलग-अलग छाँटें। इस तरह रोज इस्तेमाल होने वाला पूजा स्थल सँभालना आसान रहता है।
घर के मंदिर की सफाई कब करें?
सूखे फूल, गिरी हुई राख और तेल की बूँदें रोज या जरूरत के अनुसार हटा दें। चौकी, शेल्फ और पूजा के बर्तनों की अच्छी सफाई सप्ताह में एक बार की जा सकती है। अगर घर में रोज पूजा होती है, तो सफाई का अंतराल कम रखना सुविधाजनक होगा।
मंदिर साफ करने के लिए किसी खास वार का इंतजार जरूरी नहीं है। ऐसा समय चुनें जब आप बिना जल्दबाजी के काम कर सकें। यदि आपके परिवार में मूर्ति या पूजा स्थल हटाने के बारे में कोई रीति है, तो उसका ध्यान रखें।
सफाई शुरू करने से पहले क्या तैयारी करें?
एक साफ सूखा कपड़ा, हल्का गीला कपड़ा, छोटा ब्रश और पूजा की चीजें रखने के लिए अलग जगह तैयार कर लें। फूलों के लिए एक पात्र तथा राख, प्लास्टिक और टूटी वस्तुओं के लिए अलग पात्र रखें। इससे सफाई के बीच यह तय नहीं करना पड़ेगा कि कौन-सी चीज कहाँ जाएगी।
सबसे पहले सुनिश्चित करें कि दीपक की लौ बुझ चुकी है और उसका तेल या घी ठंडा है। अगर बिजली की झालर या लाइट लगी है, तो प्लग निकाल दें। पानी या गीला कपड़ा बिजली के स्विच और तार के पास न ले जाएँ।
घर के मंदिर की सफाई कैसे करें? आसान क्रम
1. फूल, माला और खाली बर्तन हटाएँ
पुराने फूल और सूखी माला अलग रखें। प्रसाद के बर्तन, जल का पात्र, घंटी और आरती की थाली चौकी से हटा दें। खराब या सूख चुके फूलों को मंदिर में जमा न रहने दें।
2. मूर्तियाँ और तस्वीरें सावधानी से रखें
मूर्तियों को दोनों हाथों से उठाकर स्थिर, साफ जगह पर रखें। भारी मूर्ति को खिसकाने की कोशिश न करें। काँच की तस्वीरों को एक-दूसरे के ऊपर रखने से वे फिसल या टूट सकती हैं। यदि कोई मूर्ति स्थायी रूप से लगी हुई है, तो उसे हटाए बिना आसपास की सफाई करें।
3. पहले सूखी राख और धूल हटाएँ
अगरबत्ती की राख और धूल को पहले सूखे कपड़े या छोटे ब्रश से हटाएँ। सीधे गीला कपड़ा लगाने पर राख फैलकर चौकी पर धब्बे छोड़ सकती है। कोनों और अगरबत्ती स्टैंड के नीचे जमा राख भी निकालें।
4. चौकी या शेल्फ पोंछें
चौकी की सामग्री देखकर सफाई करें। पत्थर या टाइल की सतह को हल्के गीले कपड़े से पोंछकर सूखा सकते हैं। लकड़ी या लैमिनेट पर ज्यादा पानी न डालें; हल्का नम कपड़ा इस्तेमाल करें और तुरंत सूखा पोंछें। यदि सतह पर तेल जम गया है, तो पहले उसे कपड़े से सोखें और फिर सफाई करें।
5. साफ और सूखी जगह पर सामान वापस रखें
चौकी पूरी तरह सूखने के बाद ही तस्वीरें, मूर्तियाँ और पूजा के बर्तन वापस रखें। दीपक को समतल जगह पर रखें, जहाँ पर्दा, कागज या कपड़ा लौ के पास न आए। रोज इस्तेमाल होने वाली चीजें ऐसी जगह रखें जहाँ से उन्हें उठाना आसान हो। धर्मकोष हिंदी पर घर की पूजा से जुड़े अन्य लेख भी पढ़ सकते हैं।
पूजा की मूर्ति और तस्वीर कैसे साफ करें?
हर मूर्ति पर पानी डालना ठीक नहीं है। मिट्टी, रंगी हुई, लकड़ी या विद्युत सजावट वाली मूर्ति को पानी से नुकसान हो सकता है। ऐसी मूर्तियों की धूल मुलायम सूखे कपड़े से धीरे-धीरे हटाएँ। धातु की मूर्ति पर भी कोई तेज रसायन लगाने से पहले उसकी बनावट और सतह समझें।
फ्रेम लगी तस्वीर का काँच हल्के नम कपड़े से पोंछा जा सकता है, लेकिन पानी फ्रेम के किनारों या तस्वीर के कागज तक न पहुँचे। काँच साफ करने के बाद उसे सूखे कपड़े से पोंछें। पुराने या कमजोर फ्रेम को दीवार से उतारते समय किसी की मदद लेना बेहतर है।
पुरानी पूजा सामग्री का क्या करें?
पूजा के बाद बची सामग्री अलग-अलग तरह की होती है। फूल, राख, तेल, कपड़ा, प्लास्टिक और टूटी वस्तुओं को एक जैसा नहीं सँभाला जा सकता। पहले उन्हें छाँटें; फिर उनकी स्थिति और स्थानीय व्यवस्था के अनुसार रखें या निपटाएँ।
सूखे फूल और पुरानी माला
साफ, प्राकृतिक फूलों को घर की कम्पोस्ट व्यवस्था में डाल सकते हैं, यदि आप खाद बनाते हैं। फूलों में प्लास्टिक की डोरी, तार या चमकीली सजावट हो तो वे हिस्से पहले अलग करें। फूल खराब होकर गंध देने लगें तो उन्हें मंदिर में जमा न रहने दें। नदी या तालाब में प्लास्टिक लगी फूल-मालाएँ न डालें।
अगरबत्ती और धूप की राख
राख पूरी तरह ठंडी होने दें। फिर उसे सावधानी से इकट्ठा करें ताकि वह हवा में न उड़े। राख में अगरबत्ती की प्लास्टिक पैकिंग, तार या अन्य कचरा न मिलाएँ। उसका निपटान स्थानीय कचरा व्यवस्था के अनुसार करें।
दीपक में बचा तेल या घी
बचा हुआ तेल या घी नाली में न डालें। यदि वह साफ है और आपके घर की परंपरा में स्वीकार्य है, तो अगली बार दीपक में इस्तेमाल किया जा सकता है। धूल, राख या पानी मिल गया हो तो उसे अलग रखें और स्थानीय कचरा निपटान के तरीके के अनुसार हटाएँ। दीपक और तेल को सँभालने से पहले उनके ठंडे होने की पुष्टि करें।
कपड़ा, मौली और सजावटी सामान
साफ और ठीक हालत वाले वस्त्र या सजावट को धोकर या पोंछकर फिर इस्तेमाल किया जा सकता है। फटे कपड़े, प्लास्टिक की झालर और पैकिंग को जैविक सामग्री से अलग रखें। मौली या कपड़े में प्लास्टिक और चमकीले टुकड़े जुड़े हों तो उन्हें कम्पोस्ट में न डालें।
पुरानी या टूटी धार्मिक तस्वीर का क्या करें?
तस्वीर का फ्रेम पुराना हो गया है लेकिन चित्र ठीक है, तो नया फ्रेम लगवाया जा सकता है। यदि काँच टूटा है, तो पहले हाथों की सुरक्षा का ध्यान रखें और टूटे काँच को अलग सुरक्षित रखें। कागज की तस्वीर, काँच और प्लास्टिक फ्रेम को जहाँ संभव हो, अलग-अलग करें।
तस्वीर या मूर्ति को हटाने के बारे में परिवारों की परंपराएँ अलग होती हैं। किसी खास धार्मिक प्रक्रिया के लिए अपने परिवार के बुजुर्ग या स्थानीय पुरोहित से पूछ सकते हैं। टूटा काँच, प्लास्टिक या रंगी हुई वस्तु नदी और तालाब में न डालें।
घर के मंदिर की सफाई में कौन-सी गलतियाँ न करें?
- जलता हुआ या गर्म दीपक उठाकर सफाई शुरू न करें।
- बिजली की झालर और तारों के आसपास गीला कपड़ा न लगाएँ।
- लकड़ी की चौकी या कागज वाली तस्वीर पर सीधे पानी न डालें।
- फूल, राख, तेल और प्लास्टिक को एक ही थैले में न मिलाएँ।
- नम चौकी पर तुरंत कपड़ा, तस्वीर या बिजली की सजावट न रखें।
त्योहार की बड़ी पूजा के बाद सफाई कैसे करें?
गणेश चतुर्थी, नवरात्रि या अन्य त्योहार के बाद फूल, नारियल, कलश, सजावट और प्रसाद अधिक मात्रा में बच सकते हैं। इन्हें पहले अलग-अलग रखें। खाने योग्य प्रसाद को स्वच्छता का ध्यान रखते हुए सँभालें। फूल और पत्तियाँ सजावटी प्लास्टिक से अलग करें। कलश का जल और नारियल कैसे उपयोग किए जाते हैं, यह पूजा तथा घर की परंपरा के अनुसार बदलता है।
यदि उत्सव में प्रतिमा स्थापित की गई थी, तो उसकी विदाई और सामान्य घर-मंदिर की सफाई दो अलग काम हैं। प्रतिमा के संबंध में अपने परिवार की परंपरा और अपने नगर की विसर्जन व्यवस्था का पालन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर के मंदिर की रोज सफाई करनी चाहिए?
रोज पूरी चौकी खाली करना जरूरी नहीं है। सूखे फूल, गिरी राख और गंदे बर्तन रोज हटा दें। चौकी तथा तस्वीरों की अच्छी सफाई जरूरत के अनुसार नियमित अंतराल पर करें।
क्या पूजा की मूर्तियों को पानी से धो सकते हैं?
यह मूर्ति की सामग्री पर निर्भर है। मिट्टी, लकड़ी और रंगी हुई मूर्तियों को पानी से नुकसान हो सकता है। संदेह हो तो मुलायम सूखे कपड़े से धूल हटाएँ।
पूजा के पुराने फूल घर में कहाँ रखें?
उन्हें मंदिर में सड़ने के लिए न छोड़ें। प्राकृतिक फूलों को सजावटी सामान से अलग करें। घर में कम्पोस्ट बनाते हैं तो उपयुक्त फूल उसमें डाल सकते हैं; अन्यथा स्थानीय कचरा व्यवस्था का उपयोग करें।
क्या पूजा की पुरानी सामग्री नदी में डालना जरूरी है?
नहीं। सामग्री में प्लास्टिक, तार, रंग और अन्य गैर-जैविक चीजें हो सकती हैं। नदी या तालाब में डालने के बजाय उसे छाँटकर स्थानीय संग्रह या कचरा व्यवस्था का उपयोग करें।
मंदिर साफ करते समय मूर्तियाँ कहाँ रखें?
उन्हें पास की साफ, स्थिर जगह पर रखें जहाँ गिरने या टकराने का डर न हो। भारी या नाजुक मूर्ति को बिना जरूरत न हटाएँ; उसके आसपास की जगह साफ करें।
सफाई को आसान रखने का छोटा तरीका
रोज की पूजा के बाद सूखे फूल हटाएँ, आरती की थाली अपनी जगह रखें और गिरी राख साफ कर दें। सप्ताह में एक बार चौकी, बर्तन, तस्वीरों और दीपक की अच्छी तरह जाँच कर लें। इससे घर का मंदिर साफ रहेगा और त्योहार के बाद एक साथ बहुत सारी पुरानी पूजा सामग्री सँभालने की जरूरत कम पड़ेगी।
सफाई के दौरान दीपक की बत्ती या तेल की समस्या दिखे तो पूजा करते समय दीपक बुझ जाए तो क्या करें लेख पढ़ें। इसमें लौ बुझने के सामान्य कारण और दीपक दोबारा जलाने का तरीका बताया गया है।
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